
मुझे रात भर जगाया
दिल के कोने में छुपे
गम ने जमकर रुलाया।
न उजाले में चैन
अंधेरा भी डराता है
अपनों के दिए जख्म
अब नहीं कोई सहलाता है।
साजिशों के शहर में
बन गया मैं शिकार
मांग न पाए कोई पानी
दिल के मेहमानों ने
कर दिया ऐसा प्रहार।
अब उम्मीद-ए-वफा नहीं उनसे
जिन्होंने दिल तोड़कर
सिर भी कुचल डाला
जिंदगी की इस हेराफेरी में
हमारा जहां ही लूट डाला।
चाहत में तेरी
हमने मांगी वफा सदा
तुम्हारे कदमों में बिछ जाने की
हमेशा 'बिलासपुरी' ने मांगी मुराद
लेकिन अफसोस
चकनाचूर हो गया
हसरतों का घरौंदा।
फिर भी एक ही है तमन्ना
मेरी मिट्टी भी आए काम तेरे
कतरा-कतरा खून का
पूरे कर दे अरमान तेरे
मिल जाए जो कभी सुबूत
मेरी बेगुनाही का ऐ दोस्त
सितारों में ढूंढ लेना
आपके अहसानों की रौशनी में
हमेशा जगमगाता रहूंगा।
दिल के कोने में छुपे
गम ने जमकर रुलाया।
न उजाले में चैन
अंधेरा भी डराता है
अपनों के दिए जख्म
अब नहीं कोई सहलाता है।
साजिशों के शहर में
बन गया मैं शिकार
मांग न पाए कोई पानी
दिल के मेहमानों ने
कर दिया ऐसा प्रहार।
अब उम्मीद-ए-वफा नहीं उनसे
जिन्होंने दिल तोड़कर
सिर भी कुचल डाला
जिंदगी की इस हेराफेरी में
हमारा जहां ही लूट डाला।
चाहत में तेरी
हमने मांगी वफा सदा
तुम्हारे कदमों में बिछ जाने की
हमेशा 'बिलासपुरी' ने मांगी मुराद
लेकिन अफसोस
चकनाचूर हो गया
हसरतों का घरौंदा।
फिर भी एक ही है तमन्ना
मेरी मिट्टी भी आए काम तेरे
कतरा-कतरा खून का
पूरे कर दे अरमान तेरे
मिल जाए जो कभी सुबूत
मेरी बेगुनाही का ऐ दोस्त
सितारों में ढूंढ लेना
आपके अहसानों की रौशनी में
हमेशा जगमगाता रहूंगा।
ईमानदारी झलकती है आपकी लाइनों में ...शुभकामनायें !
ReplyDeleteजिंदगी कि सच्चाई लिख डाली है....
ReplyDeletenice
ReplyDeleteमेरी बेगुनाही का ऐ दोस्त
ReplyDeleteसितारों में ढूंढ लेना
आपके अहसानों की रौशनी में
हमेशा जगमगाता रहूंगा।
बहुत खूब .....!!
गहरी चोट ही लेखन की वफादार सीढ़ी है ......!!
आप ने बहुत बढ़िया लिखा है.बहुत बहुत बधाई .
ReplyDeleteफिर भी एक ही है तमन्ना
मेरी मिट्टी भी आए काम तेरे
कतरा-कतरा खून का
पूरे कर दे अरमान तेरे
मिल जाए जो कभी सुबूत
मेरी बेगुनाही का ऐ दोस्त
सितारों में ढूंढ लेना
आपके अहसानों की रौशनी में
हमेशा जगमगाता रहूंगा।
गहरी छाप छोड़ गई ये पंक्तियाँ.