तलाश...
Tuesday, 6 April 2010
लंबी रात
चौराहे पर
चमकता विशाल प्रकाशपुंज
करता है उजाला
लेकिन
मैं तो हूँ बेघर
फुटपाथ है बसेरा
रोशनी में मेरी
पीठ पर न बरस पड़े
कहीं 'खाकी' का डंडा
इसलिए
ढूंढता हूँ अँधेरा कोना
जहाँ
न कोई आये न जाये
बस!
ये लंबी रात
सुकून से कट जाये.
1 comment:
mridula pradhan
29 October 2010 at 08:29
bahot achcha laga.
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